'मफ़लर मेन' से 'माफ़ी मेन' बने युगपुरुष केजरीवाल

'मफ़लर मेन' से 'माफ़ी मेन' बने राजनीति के युगपुरुष! जो राजनीति बदलने आये थे वे अब खुद बदल बैठे है। ये चोर है,वो चोर है! वो भ्रष्ट है,ये भी भ्रष्ट है! कबीरदास जी इसीलिए तो कह गए कि 'बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,जो दिल खोजा आपना,मुझसे बुरा न कोय' हमारे पास सबूत है जी! हो सकता है सबूतों की भी वैद्यता होती हो।

सत्ता में आने से पहले तक की ही उनकी समयावधि हो! सत्ता प्राप्ति के बाद राम तेरी गंगा मैली हो गई। सर्टिफिकेशन डिपार्टमेंट भी उतना अच्छा काम नही कर पता था जितना अच्छा साहब जी बैठे बिठाये कर देते है। जिस तरह मध्यकाल में यूरोप में चर्च के पोप यह तय करते थे कि कौन स्वर्ग में जायेगा कौन नर्क में ठीक आधुनिक काल में कौन ईमानदार बनेगा कौन बेईमान यह काम 'दिल्ली के मालिक' का है।

यह प्रमाणित हो गया कि राजनीति को कोई बदल नही सकता इसके उलट राजनीति अच्छे-अच्छो को बदल कर रख देती है। टेलीविजन के उस विज्ञापन की भांति कहा जाए तो पहले मैं बहुत परेशान रहता था, दुःखी था फिर मैं नेता बन गया! दुनिया अब मुझसे परेशान रहती है।

बहरहाल माफ़ी मांगना तो अच्छी बात ही है! बड़े सयाने कह कर गए है क्षमा वीरस्य भूषणम्  लेकिन राजनीति में सब कुछ पूर्व नियोजित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। गाली देने से लेकर माफ़ी मांगने तक का सफर किसी वांछनीय लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ही होता है।

दिल्ली सब देखती है,कर भी क्या सकती? नेता तो पांच साल तक माफ़ी मांग सकते है लेकिन जनता को तो पांच बरस में बस एक 'चान्स' ही मिलता! अच्छे दिनों की बात हो रही थी न, तो लो आ ही गये ऐसा ही समझो! एक बार जो मैं कमिटमेंट कर देता हूँ तो फिर अपने आप की भी नही सुनता,यह बात अलग है कि मानहानि के केस चल रहे हो तो मैं माफ़ी मांग लेता हूँ।

क्या इसे पहले थूक कर फिर चाट लेने की परंपरा के अन्तर्गत मान लिया जाए? घोर क्रन्तिकारी 'बाबा परिवर्तनलाल' के व्यवहार में हुए इस परिवर्तन ने हैरत में डाल दिया। यूँ तो समाज विज्ञान विषय में पूर्व घटित घटनाओं के आधार पर विज्ञान विषय की भांति भविष्यवाणी करने की क्षमता होती है।

किंतु इन साहेब के व्यक्तित्व के आगे समाज विज्ञान अपनी भविष्यवाणी करने की क्षमता को खो चुका है, वह बेबस है,लाचार है! गिरगिट भी सब देख शर्मा रहा है।

ताजा सूत्रों के अनुसार उसका बयान है कि अब रंग बदलने की उपमा में मेरा नाम आया तो अच्छा न होगा,मेरी जगह अब परिवर्तनकारी बाबा का नाम लिया जाए,मैं स्वयं उनका पथ प्रदर्शक हूँ,अनुयायी हूँ। माफ़ी मांगने की श्रृंखला चल रही है, हम भी मांग लेते साहब! हमका भी माफ़ कर दियो बड़े बाबू।

(नोट- यह आर्टिकल लेखक की अनुमति से लगाया गया है- सौरभ गिरीश जैन)

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'मफ़लर मेन' से 'माफ़ी मेन' बने युगपुरुष केजरीवाल 'मफ़लर मेन' से 'माफ़ी मेन' बने युगपुरुष केजरीवाल Reviewed by Rkz Theatre Team on March 23, 2018 Rating: 5

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