Acting Tips: एक्टिंग को देखने से ज्यादा प्रैक्टिकल से सीखें

एक्टर तो हर कोई होता है। लेकिन फ़िल्मों और टीवी सीरियल्स में काम करने के लिए कई टेक्नीकल बातें सीखनी-समझनी पड़ती है। शूटिंग के दौरान कैमरे के सामने सीमित फ्रेम में काम करना वाक़ई टेढ़ी खीर होती है। चेहरे के एक्सप्रेशन आदि पर भी बहुत कंट्रोल करना होता है। ये सब बातें पढ़कर नहीं समझी जा सकती। प्रेक्टीकली करने से ही आप समझ पाएंगे। क्योंकि बातें करना अलग बात है, और सचमुच कुछ करना अलग बात है।

मेरा ज़ोर हमेशा इसी बात पर रहता है कि आप हर तरह के इमोशन पर प्रेक्टीकली ख़ूब काम करें। इसके लिए मैं अपनी क्लास में कई तरह की क्सरसाइज़ कराता हूँ। कई तरह के प्रभावशाली मॉनोलॉग्स और सीन कराए जाते हैं। इससे आपकी कमियाँ पकड़ में भी आती जाती हैं और दूर भी होती रहती हैं।

क्लास में एक्टिंग प्रेक्टिकल्स करते-करते आप कई प्रकार के कैरेक्टर में ख़ुद को ढालना सीखते जाते हैं। एक्टिंग को निखारने-संवारने के लिए लगातार कई दिनों तक गहन प्रशिक्षण की ज़रूरत है। कई लोग डायलॉग डिलीवरी में बहुत कमज़ोर होते हैं। उनका शब्द उच्चारण बहुत ग़लत होता है, लेकिन उन्हें ये गुमान होता है कि वे बिल्कुल सही बोलते हैं।

ये भ्रम जल्दी टूट जाता है, जब डिक्शन क्लासेज़ के दौरान उन्हें अपनी भाषा और उच्चारण की कमियाँ पता चलती हैं। धीरे-धीरे उनका डिक्शन दुरुस्त होता जाता है और भाषा में जान आने लगती है। कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो कुछ शर्मीले स्वभाव के होते हैं। अंतर्मुखी होते हैं। या फिर जिन्होंने कभी भी एक्टिंग नहीं की है।

ज़्यादातर स्टूडेन्ट्स ऐसे ही होते हैं। इसीलिए क्लासेज़ के शुरू के कई सेसन्स उनकी झिझक, शर्मो-हया को दूर करने के ही होते हैं। कई प्रकार की एक्टीविटीज़ कराई जाती हैं, जिन्हें करते-करते वे सहज होने लगते हैं और खुलकर अपनी बात कहने लगते हैं। ये सेशन्स हर नए एक्टर के लिए बहुत ज़रूरी हैं। क्योंकि इन्हें करते-करते ही ख़ुद से ख़ुद की पहचान होने लगती है। अपनी कमियों और शक्तियों का अहसास होने लगता है, जो जिनकी जानकारी होना हर नए एक्टर के लिए ज़रूरी है।

इसके बाद ही वो एक्टिंग की अकली सीढ़ी पर चढ़ने योग्य हो पाता है। सीन (Scene) करने के दौरान किस तरह अन्य सहयोगी कलाकार के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। कैसे तालमेल बैठाया जाता है। कैसे मिलजुल कर सीन को बेहतर से बेहतर बनाया जा सकता है, आदि बातें सीखने को मिलती हैं।

इनके अलावा ऑडिशन टेक्नीक्स और ऑडिशन देने को तरीक़े भी आप प्रेक्टीकली क्लास में सीखेंगे। इससे काम मिलना आसान हो जाता है। वरना बरसों तक थिएटर करने वाले अच्छे आर्टिस्ट भी ऑडिशन में सिलेक्ट नहीं हो पाते और उन्हें समझ में भी नहीं आता कि ग़लती कहाँ हो रही है। और भी कई बातें हैं जो क्लास के दौरान आपको सीखने को मिलेंगी। ये बहुत ही पावरफ़ुल कोर्स है।
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Acting Tips: एक्टिंग को देखने से ज्यादा प्रैक्टिकल से सीखें Acting Tips: एक्टिंग को देखने से ज्यादा प्रैक्टिकल से सीखें Reviewed by Rkz Theatre Team on April 23, 2018 Rating: 5

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