ब्लॉग: नाटक- “मैं भी बच्चन”, विजय दीनानाथ चौहान…….पूरा नाम

 एक छोटे से गाँव का बच्चा रामलीला भी अमिताभ बच्चन के अंदाज़ में करता है क्योंकि उसका नाम है विजय दीनानाथ चौहान। ये महज एक संजोग है ि उसके पिता का नाम दीनानाथ चौहान है और मां का नाम सुहासिनी चौहान और उसकी प्रेमिका है रेखा।

1990 में, अग्निपथ के इस डायलॉग को सबसे पहले कादर खान ने लिखा और बोला अमिताभ बच्चन ने। इसे बड़ी खूबसूरती के साथ मुकुल आनंद जी ने निर्देशित किया। फिर, इसे 2012 में लिखा गया और ह्रितिक रौशन ने बड़े बेहतरीन तरीके से इस डायलॉग को बोला।

2018 में, रंगमंच पर पहली बार इस डायलॉग को नए अंदाज में फिर किसी ने बोला। Renaisstance Theatre Society ने शुक्रवार को LTG ऑडटॉरीअम में प्रस्तुत किये गए नाटक “मैं भी बच्चन”। 2 घंटे 20 मिनट का नाटक बहुत ही रोचक था। जिसकी पटकथा लेखन, अभिनय और निर्देशन सिर्फ एक ही आदमी ने किया और वो है मोहित त्रिपाठी। पूरा का पूरा आडोटोरियम दर्शको के कौतुहलता से भरा हुआ था की अब आगे क्या नया होगा।

शुक्रवार की शाम 7 बजे, रिमझिम बारिश और पहला प्यार (रंगमंच) से मिलना, मौसम को सुहाना बना दिया। एक ऐसे शख्स को देखना जिसे देखकर अभिनय अपने सरल अंदाज में आ जाता हो और हर किसी को रंगमंच का वो किरदार अपनी कहानी लगने लगे। मोहित त्रिपाठी, एक अनूठा लेखक, उम्दा निर्देशक और उत्कृष्ट अभिनय का जीता जागता एक मिसाल हैं।

गाँव का विजय दीनानाथ चौहान का सपना सिर्फ एक ही है की वो भी अमिताभ बच्चन बने। अग्निपथ फ़िल्म जितना गंभीर डायलॉग्स और दृश्यों से भरे हैं वही “मैं भी बच्चन” नाटक कॉमेडी और एक्शन का मिश्रण है।” इतना नया करने के लिए एक लेखक और निर्देशक को कितनो चीज़ो से गुज़रना पड़ा होगा ये सोचने वाली बात है।

विजय दीनानाथ चौहान को पता चलता है दिल्ली के “मण्डी हाउस” के बारे में और वो ठान लेता है की वो वहां जा कर अपने सपने को पूरा करेगा। अपने माँ-बाप, दोस्त, प्रेमिका और अपने गाँव को छोड़कर अपने सपने को पूरा करने दिल्ली आता है। फिर, मुंबई जाता है स्टार बनने और बनता भी है। चीजे बनती-बिगड़ती है। अब्दुल से भी मुलाकात होती है जो उसकी मदद करता है उसके सपनो के साकार होने में।

अपने माँ-बाप का साथ देने के लिए और उनके लिए गाँव के दबंग ठाकुर से लड़ने के लिए वो वापस आता है।  फिर इनकी जीत होती है। रंगमंच का दीनानाथ चौहान सलामत है।

माँ के रोल में “शिल्पा शुक्ला” ने गजब का अभिनय किया है। शिल्पा शुक्ल अपने अभिनय के लिए जानी मानी जाती है। रंगमंच हो या फ़िल्म, शिल्पा हमेशा अपने अभिनय से उस कैरेक्टर को दमदार बना देती हैं।

विजय दीनानाथ चौहान का दोस्त का रोल बहुत असरदार है। उसका करेक्टर मिथुन चक्रब्रती से ज्यादा दमदार है। रेखा (प्रेमिका) का अंदाज बहुत ही निराला है।

रंगमच एक लाइव शो होता है इसमें कुछ भी सुधारने का मौका नहीं होता है। इस नाटक में संगीत और डांस का उम्दा प्रयोग किया गया है। इसकी लाइटिंग कमाल की थी। पूरी टीम ने इतनी खूबसूरती के साथ अपने काम को किया की 2 घंटे 20 मिनट का पता ही नहीं चला। मोहित त्रिपाठी से मैं 12 साल पहले मिला था। एक बेहतर कालकर जो हर करेक्टर को इतनी बखूबी निभाते हैं की वो जीवित हो जाता है।

मैं चाहता हूँ की मोहित त्रिपाठी, आप इस नाटक का मंचन फिर से करे। अगर इस नाटक का मंचन कहीं भी आपके शहर में हो चूकियेगा मत। नए अनुभव के लिए, देखिएगा जरूर।

(नोट- यह ब्लॉग पंकज कुमार, स्वतंत्र पत्रकार द्वारा लिखा गया है और तस्वीर प्रतिकात्मक है)
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ब्लॉग: नाटक- “मैं भी बच्चन”, विजय दीनानाथ चौहान…….पूरा नाम ब्लॉग: नाटक- “मैं भी बच्चन”, विजय दीनानाथ चौहान…….पूरा नाम Reviewed by Rkz Theatre Team on April 20, 2018 Rating: 5

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