Raazi: फिल्म राज़ी की डायरेक्ट मेघना गुलजार से एक मुलाकात और जानें क्या है सोच

कई दशकों में यह पहली फिल्म है जब भारत-पाकिस्तान के संघर्ष के बीच पाकिस्तान के आर्मी ऑफिसर को अनाड़ी या क्रूर नहीं दिखाया गया है। हमारे सिनेमा के लिए यह बहुत अच्छा है कि हम इस तरह की फिल्में बना रहे हैं। इस तरह की स्टोरी न सिर्फ आपके जेहन में आई, बल्कि आपने इस पर फिल्म बनाई और बिना किसी कट के यह प्रदर्शित भी हुई। क्या इससे हमारी क्रिएटिव दुनिया में मैच्योरिटी पता नहीं लगता/

हां, वह धुंध होती है न जो दिल्ली के ऊपर आ जाती है। वे जो हर चीज पर बहुत ही कठोर विचार रखते हैं, उन्हें जो भी कुछ कहा जाता है, मैं उन सबको इस धुंध की तरह देखती हूं, जो हमारी सच्चाई देखने की नजर को रोकते हैं। एक समय आएगा जब यह धुंध छंट जाएगी। मैं जिस तरह इसे देखती हूं, हो सकता है कि मैं अपने देश और लोगों को लेकर बहुत ही आशावादी हूं। स्वाभाविक रूप से हम लोग बहुत ही सहिष्णु, प्यार करने वाले और सांस्कृतिक व ऐतिहासिक रूप से समृद्ध लोग हैं। इसलिए तो हम अभी तक हम हैं। हम खुद पर हावी होने वाली आक्रामकता से बचे हैं। हालांकि अब भी हम कई मौकों पर आक्रामक हो जाते हैं। ये एक चक्र होता है। लेकिन मुझे लगता है कि अब यह भी गुजर चुका है। हो सकता है कि यह चीजों को देखने का बहुत ही सिम्पल और आशावादी तरीका है, लेकिन मैं इसी पर भरोसा करती हूं।

राजी में देश के चलते किसी को न तो बहुत महान दिखाया गया है और न ही बहुत ही हैवान। क्या फिल्म रिलीज होने से पहले आप नर्वस थीं कि दर्शक इसे स्वीकार करेंगे या नहीं/

कई पाकिस्तानी लोग, जिन्हें लग रहा था कि यह फिल्म पाकिस्तानियों को नीचा दिखाएगी, वे फिल्म देखकर हैरान रह गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बारे में बात की। मैं यही मैसेज तो देना चाहती थी कि अपने देश से प्यार करने का मतलब दूसरे से नफरत करना नहीं है। ये दोनों एक-दूसरे से जुड़े नहीं हैं। मैं पाकिस्तान से नफरत नहीं करती, तो क्या इसका ये मतलब है कि मैं अपने देश से प्यार नहीं करती/ ये दोनो कहीं एक दूसरे से नहीं जुड़े हैं। मैं बिना किसी से नफरत किए, अपने देश से प्यार करती हूं। दर्शकों को यह पसंद आया, 95% लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं।

इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। उनका कहना है कि ये फिल्म सिर्फ पुराने ढर्रे पर नहीं बनी है। तो क्या यह इस ओर इशारा है कि द्वंद और विरोधाभासों के बीच इस तरह की कहानी कहने का स्कोप बचा है।

मुझे तो ऐसा लगता है और उम्मीद भी है। जिंदगी सिर्फ ब्लैक और वाइट नहीं है और न ही हमारी भावनाएं सिर्फ ब्लैक और वाइट हैं। जिंदगी में आने वाली कठिनाइयां, मुश्किलें और दुख कई तरह के होते हैं। हम हमेशा इनसे दूर क्यों भागें। हमें इनका सामना करना चाहिए, इनका जश्न मनाना चाहिए।

मेघना गुलजार ने कहा मैं फिल्म के जरिए यही संदेश देना चाहती थी कि अपने देश को प्यार करने का मतलब यह नहीं है कि हम दूसरे से नफरत करें। ये दोनों एक-दूसरे से जुड़े नहीं हैं। अपने देश से प्यार करने के लिए आपको पंचिंग बैग की जरूरत नहीं है। सभी तारीफ कर रहे हैं कि राजी कट्टर देशभक्ति वाली फिल्म नहीं है। दर्शक इसे समझ रहे हैं, न सिर्फ हमारे दर्शक, बल्कि पाकिस्तान के बाहर रह रहे पाकिस्तान भी, जिन्होंने यह फिल्म देखी है।

लेखक गुलजार ने कहा कि सीमा के दोनों तरफ के लोग ऐ वतन गा सकते हैं। यही तो इसकी खूबसूरती है। यह गाना सीमा के किसी तरफ के लोगों का पक्ष नहीं लेता है। यह फिल्म बिल्कुल पक्षपात का प्रचार नहीं करती है।
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Raazi: फिल्म राज़ी की डायरेक्ट मेघना गुलजार से एक मुलाकात और जानें क्या है सोच Raazi: फिल्म राज़ी की डायरेक्ट मेघना गुलजार से एक मुलाकात और जानें क्या है सोच Reviewed by Rkz Theatre Team on May 20, 2018 Rating: 5

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