ब्लॉग: एक्टिंग को लेकर जब तय किया कॅरियर


दिसंबर 2015, जब मैंने तय किया कि मुझे थिएटर करना ही है। अभिनय की तरफ मैं कब झुका, यह मुझे ठीक-ठीक याद नही है, पर वो साल 2015 ही था जब मेरे जीवन में कई तरह के बदलाव हुए, और उनमें से एक मेरा थिएटर की तरफ आकर्षित होने भी था।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में दाखिले के बाद मैं बनारस में होने वाले रंगमंच से संबंधित कार्यक्रमों के बारे में पता करने लगा था। फिर मुझे मालूम हुआ कि डी? ए? वी कॉलेज( जो की बी?एच? यू के ही अंतर्गत है) के पास ही एक संस्था है जहाँ नाटक हुआ करते हैं, और उस संस्था का नाम है "श्री नागरी नाटक मंडली।

मुझे थिएटर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, जिस वजह से मेरे मन मे कई तरह के सवाल उठ रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या वहां एक्टिंग सीखने के पैसे लगते हैं? क्योंकि मेरी स्थिति वैसी नही है कि मैं पैसे देके अभिनय सीख पाऊं।

22 दिसंबर को काफी सोच विचार के बाद शाम के वक़्त मैं श्री नागरी नाटक मंडली गया। गेट पर बैठे गार्ड ने काफी सवाल जवाब के बाद मुझे अंदर जाने दिया। अंदर जाने के बाद मैंने वहाँ बैठे लोगों से पूछा कि क्या यहाँ एक्टिंग सिखाई जाती है? किसी ने कहा कि सिखाई तो जाती है पर अभी नए लोगों के लिए जगह नहीं है।

एक पल के लिए मन मायूस हुआ। धत्त साला, कितनी हिम्मत जुटाई थी यहां आने के लिए। पता नही इतनी हिम्मत दोबारा कब आएगी। तभी अचानक दीपकk भाईया आ पहुंचे। जो कि मेरे लिए बाकी लोगों की तरह अनजान ही थे। आकर मुझसे कहा कि आप टेंशन न लें, हमारे सर अर्पित शिधोरे जी एक नए नाटक की रिहर्सल करवा रहे हैं। मैं उनसे बात करता हूँ, शायद आपको जगह मिल जाए। तब जाके दिल को तसल्ली हुई।

कुछ इंतज़ार के बाद अर्पित सर पहुंचे। दीपक भईया ने मिलवाते हुए कहा? "सर, ये अभी अभी आए हैं और हमारे साथ काम करना चाहते हैं।" सर ने काफी गर्मजोशी से हाथ मिलाया, फिर पूछा, "क्या करते हो?
मैंने कहा कि सर बी?ए फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट हूं। उन्होंने पूछा क्लास कितने बजे तक होती है तुम्हारी, मैंने कहा "तीन बजे तक"। उन्होंने चौंकते हुए पूछा?" अरे!! तीन बजे तक क्लास, फिर थिएटर, तो खाना कब खाओगे?" ये बात मुझे अच्छी लगी।

वर्ना किसे फ़िक्र होती है कि कोई खाना कब खाएगा। अपना काम निकल जाए बस। उसके बाद मैंने सबके सामने अपना परिचय देने की औपचारिकता पूरी की। साथ ही साथ मुझे कुछ करके दिखाने के लिए कहा गया, ये जानने के लिए की मैं थिएटर के लायक हूं भी या नहीं। सब कुछ हो जाने के बाद सर ने कहा कि तुम कल से आना शुरू कर दो। मेरे पांव जमीन पर नहीं थे उस वक़्त?

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ब्लॉग: एक्टिंग को लेकर जब तय किया कॅरियर ब्लॉग: एक्टिंग को लेकर जब तय किया कॅरियर Reviewed by Rkz Theatre Team on July 01, 2018 Rating: 5

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